फेंग शुई टिप्स
फेंग शुई चीन की एक विद्या है तो पिरामिड मिस्र की देन है। ये दोनों ही मानव कल्याण के लिए हैं। फेंग शुई दो शब्द – फेंग और शुई से मिलकर बनी है। यह चीन की वास्तु शास्त्रीय पद्धति है। चीनी भाषा में फेंग का अर्थ है जल और शुई का अर्थ है वायु इससे यह ज्ञात होता है कि फेंग शुई प्रकृति के दो प्रमुख तत्वों के सन्तुलन पर आधारित विद्या है। इन दोनों तत्वों का सही सन्तुलन व्यक्ति को स्वास्थ्य, यश, सम्मान और अच्छा भाग्य देने मैं समर्थ है।
यह विज्ञान हमें बताता है कि हम अपने आस-पास की वस्तुओं को आकार, रंग, तत्व, ग्रह और अंकों के हिसाब से किस दिशा में रख सकते हैं। अपने आस-पास की वस्तुओं को इस तरह से रखते हैं ताकि न तो ऊर्जा का बहाव कहीं रुकने पाए और न ही ऊर्जा की गति इतनी तेज हो कि वो हमें कुछ दिए बगैर भवन से निकल जाए।
फेंग शुई के आधार पर किया गया संशोधन किसी भी आम मनुष्य के भाग्य को ठीक करने का सबसे सरल इलाज है । इसके पीछे एक महान् कारण है । इसे भाग्य का त्रित्व कहते हैं भाग्य तीन प्रकार का होता है
1. पृथ्वी से प्राप्त भाग्य
2. मनुष्य का अपने द्वारा प्राप्त किया गया भाग्य और
3. स्वर्ग द्वारा प्राप्त किया गया भाग्य ।
जिसे आप अपने पूर्व जन्मों के कर्मों के कारण प्राप्त करते हैं जैसे ग्रहों, नक्षत्रों, सितारों का आपके भाग्य पर बहुत प्रभाव या आपके पूर्व जन्म के कर्मों के प्रतिफल या पुरस्कार के रूप में होता है। इस प्रकार भाग्य वह होता है जिसे मनुष्य अपनी कड़ी मेहनत और लगन के बल पर हासिल करता है। इसे कर्म कहते हैं। आमतौर पर मान्यता यह है कि प्रत्येक व्यक्ति अपनी-अपनी सामर्थ्य के अनुसार पूरी शक्ति के साथ काम करता है।
पृथ्वी से प्राप्त भाग्य वह भाग्य होता है जिसे आप उन स्थानों से अर्जित करते हैं जहाँ आप रहते हैं अथवा काम करते हैं।
इस प्रकार के भाग्य का संशोधन करना सर्वाधिक आसान होता है और इसे पूर्ण रूप से आपके पक्ष में भेजा जा सकता है। फेंग शुई इस अवस्था में लाभकारी सिद्ध हो चुकी है।
फेंग शुई में जिस पद्धति का सर्वाधिक उपयोग होता है वह है कम्पास पद्धति जो मुख्य रूप से लो-शु (चमत्कार वर्ग) पा- कुआ चौखट पर आधारित है।
फेंग शुई के उपयोग से हम अपने फ्लैट को घर की अनुभूति दे सकते हैं तथा उसे सामंजस्यपूर्ण बना कर स्वयं को पहले से ज्यादा प्रसन्न, स्वस्थ तथा जीवन के प्रत्येक पक्ष को ज्यादा सफल बना सकते हैं।
चीन के अधिकांश महत्वपूर्ण भवनों का निर्माण फेंग शुई के सिद्धान्तों के अनुसार किया गया है।
फेंग शुई का उद्देश्य ऐसे पर्यावरण का निर्माण करना है जिससे ‘ची’ सुगमता से प्रवाहित हो ताकि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बना रहे। जिस घर में ‘ची’ का प्रवाह संतुलित व निर्बाध होता है उसमें रहने वाले अनुकूल स्थिति में होंगे और उनकी जिंदगी बड़ी सरलता से व्यतीत होगी जब ‘ची’ की गति सुस्त और मंद पड़ जाती है तो इसकी संभावना बढ़ जाती है कि हर रोज नयी समस्याओं का सामना करना पड़े।
जिस ऑफिस में ‘ची’ का प्रवाह मुक्त व स्वच्छंद होता है वहां कर्मचारी सुख और मददगार होते हैं, योजनाएं समयानुसार पूरी होती हैं और तनाव का नामोनिशान नहीं रह जाता। जहां ‘ची’ का प्रवाह रुका हुआ होगा, वहां सौहार्द का अभाव होगा और व्यापार कभी प्रगति नहीं करेगा चीन में यह ‘ची’ कहलाती है तो जापान में ‘की’ और भारत में ऊर्जाशक्ति कहलाती है।
जिस स्थान पर दोनों में से किसी भी ‘ची’ की उपस्थिति नहीं हो वहां ‘शा’ की उपस्थिति होती है। यह वह शक्ति है जो कि नकारात्मक व हानिकारक दुष्ट शैतान का प्रतीक है। जिस स्थान पर ‘ची’ का प्रवाह होता है वह स्थान फेंग शुई सम्भव होता है।
ये दोनों परस्पर विरोधी हैं परन्तु एक-दूसरे के तत्वों को स्वयं में समाहित किये रहते हैं। जैसे कि यीन में सूक्ष्म प्रकाश तथा यांग में भी सूक्ष्म अन्धकार होता है। इस प्रकार से दोनों तत्व एक-दूसरे पर आश्रित हैं। ब्रह्माण्ड की प्रत्येक वस्तु यीन और यांग ऊर्जाओं से मिलकर बनती है तथा एक-दूसरे के साथ प्रतिक्रिया करती रहती है।
यीन व यांग में अनुपाताक सन्तुलन होने पर संसार में समरसता और सुमधुरता पायी जाती है। यांग शक्ति का चिन्ह ऊष्णता एवं दक्षिण दिशा है तथा यह ऊर्ध्वगामी होता है। इसके विपरीत यीन शीत का प्रतीक है। इसकी दिशा उत्तर है। यीन और यांग के सन्तुलन से आवास में सुख-शान्ति ओर समृद्धि स्थापित होती है।
यह पूरा का पूरा चिन्ह ब्रह्माण्ड में एक तरह का सन्तुलन बनाता है चाहे उसमें यीन ज्यादा हो या यांग रात के बाद सुबह होती है एवं शरद और सर्दी के बाद बसन्त और गर्मी इसी तरह मनुष्य को भी अपनी जिन्दगी में सन्तुलन बनाना पड़ता है। इसी तरह हम यांग द्वारा बाकी की यीन का सन्तुलन बनाने की कोशिश करते हैं।
फेंग शुई केवल कुछ कठोर सिद्धान्त नहीं है जो माने जाएं। यह एक कला है जिसे लागू कर आप अपने व्यक्तित्व चुनाव आदि में बदलाव लाकर एक आदर्श फेंग शुई घर का निर्माण कर सकते हैं।
आपका घर आपके लिए और आपके परिवार के लिए आदर्श होता है। इसका प्रभाव आपके पूरे जीवन पर देखा जा सकता है।
फेंग शुई के सिद्धान्तों को अपने घर पर लागू करने के बाद आप और आपका परिवार जिन्दगी में नए स्तर का अनुभव कर सकते हैं।
आप अपने गार्डन, रसोई, भोजनगृह, शयनकक्ष व बाथरूम में फेंग शुई का उपयोग करके जीवन में अच्छे परिणामों का अनुभव कर सकते हैं। इनके अलावा फेंग शुई में और बहुत सी रहस्यमयी चीजें हैं जिनका उपयोग करके आप अपने जीवन को सुखी व समृद्धिशाली बना सकते हैं।

फेंगशुई टिप्स
- घर में कैक्टस के पौधे ना रखें। कैक्टस का पौधा नकारात्मक ऊर्जा प्रवाहित करता है।
- सूखे हुए फूल नकारात्मक ऊर्जा का प्रनिनिधित्व करते हैं। उन्हें मुरझाते ही फेंक दें। ताजे फूल सौभाग्यवर्द्धक होते हैं।
- बंद पड़ी घड़ियां नकारात्मक ऊर्जा की प्रतीक होती हैं। इन्हें तुरंत ठीक कराएं।
- घर में हिंसात्मक तस्वीरें ना लगवाएं। घर के सदस्य तनाव में रहते हैं ।
- रात को बाहर कपड़े सुखाने से नकारात्मक ची पहननेवाले के मन पर बुरा प्रभाव डालती है।
- शौचालय का दरवाजा खुला नहीं रखना चाहिए। नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश करती है।
- दरवाजें के ऊपर कैलेंडर अथवा घड़ी ना लगाएं। यह दीर्घायु के लिए बुरा है।
- कैश बॉक्स, बैंक पास बुक, कैश रजिस्टर पर 3 फेंग शुई सिक्के चिपकाने से आय में वृद्धिहोती है।
- बीम के दोषों से छुटकारा पाने के लिए लकड़ी की बांसुरियों को लाल फीते की सहायता से बांध कर इसके मुख की ओर करके बीम से 45 डिग्री के कोण पर लटकाएं।
- लाल धागे में बंधे 3 फेंग शुई के सिक्के एवं 3 छोटी घंटियां दरवाजे में लटकाने से समृद्धि आती है। पर ये उन दरवाजों के पीछे नहीं लगाने चाहिए, जो बाहर की ओर खुलते हैं।
.
.
.
- मुंह में सिक्का लिए 3 टांगोंवाला मेढ़क घर में इस तरह रखें कि लगे वह घर में प्रवेश कर रहा है। इससे प्रतीत होता है कि मेढ़क घर में धन ला रहा है। यदि इसका मुंह बाहर की तरफ कर दें, तो प्रभाव उल्टा हो जाएगा। इसे ड्राइंगरूम में रखना शुभ है शौचालय में नहीं रखना चाहिए ।
- सौभाग्य वृद्धि के लिए घर में ड्रैगन रखें। इसे ड्राइंगरूम में लगाते हैं पर इसे शयनकक्ष में नहीं रखना चाहिए । • ड्रैगन के मुंहवाला यान घर में रखें। यह इस बात का प्रतीक है कि हमारा परिवार लंबे समय तक सुख समृद्धि से चलता रहेगा।
- धन-समृद्धि के लिए घर में कैश-ज्वैलरी रखने की जगह पर सोने की नाव रखें। इसे दक्षिण-पूर्व दिशा में रखते हैं।
- कैरियर एजुकेशन तथा व्यापार में सफलता के लिए क्रिस्टल ग्लोब कमरे में रखें। इसे दिन में 3 बार घुमाएं। इससे ग्लोब से निकली सकारात्मक ऊर्जा पूरे क्षेत्र में फैल जाती है। प्रयोग से पहले इस ग्लोब को स्टैंड से उतार कर नमक के पानी में धो कर कांच की बरतन में रख कर 2-3 घंटे सुबह की धूप में रखते हैं।
- पश्चिम तथा उत्तर पश्चिम दिशा में धातु से बने सिक्कों का कटोरा या पौधा रखने से मित्रों की संख्या बढ़ती है।
- घोड़े ऊर्जा प्रवाहित करते हैं। इनका चित्र प्रवेश द्वार पर लगाने से व्यक्ति सफलता की ओर अग्रसर रहता है।
- पति-पत्नि के शयनकक्ष में लव बर्ड लगाने से उनके बीच रोमानी संबंध बने रहते हैं लव बर्ड खरीदते समय ध्यान रखें कि उसमें 2 ही परिदे हों।
- जिन बच्चों का पढ़ाई में मन ना लगता हो, उनके स्टडी टेबल पर एजुकेशन टॉवर रखने से लाभ मिलता है। इसे उत्तर-पूर्व दिशा में रखना चाहिए।
- चीन में चांद को विवाह का देवता मानते हैं। पूर्णिमा के दिन अविवाहित कन्या को 1 संतरा नहर, नदी या समुद्र में प्रवाहित करना चाहिए। मान्यता के अनुसार वायु और जल के देवता कन्या का संदेश चंद्रमा तक पहुंचा दते हैं, जिससे कन्या को जल्द ही मनचाहा वर मिल जाता है।
- चांद की रोशनी या चंद्रमा का चित्र भी अविवाहित कन्याओं के कमरे में लगाने से उन्हें योग्य वर मिलता है।
- 2 लोगों के बीच रिश्ते की गरमाहट बरकरार रखने के लिए 2 डॉल्फिन का चित्र लगाएं। अगर आप बिजनेस पार्टनरशिप में हैं, तो भी डॉल्फिन का चित्र लगा सकते हैं।
.
- चील सुरक्षा की प्रतीक है। इसकी मूर्ति घर में रखने से बीमारियों तथा दुश्मनों से रक्षा होती है।
- मछलियां संपत्ति और समृद्धि दिलाती हैं। इसलिए छोटी मछली की मूर्ति घर के संपत्ति क्षेत्र में रखें। इसे दक्षिण-पूर्व या उत्तर दिशा में रखते हैं।
1. झाड़-फानूस- ‘ची‘ – आपके घर में दक्षिण पश्चिम दिशा का कोना पृथ्वी तत्व से सम्बन्ध रखता है। यह विवाह एवं आपसी सम्बन्धों के पहलू से जुड़ा हुआ है। यदि आपका दीवानखाना इस दिशा में है। तो आप इस जगह का फायदा उठाएं और यहां एक झाड़फानूस लगाइए प्रतिदिन दो घन्टे शाम के समय इसे जला कर रखिए।
इससे आपके परिवार के सदस्यों में मेल-जोल की भावना बलवती होगी और साथ ही साथ अविवाहित व्यक्तियों के विवाह होने की सम्भावनाएं भी बढ़ेंगी।
2. बागवा दर्पण – इस प्रकार के बागवा दर्पण चीन में घरों दुकानों के बाहर लगा कर उन प्रतिकूल ऊर्जाओं का प्रतिरोध किया जाता है जिनसे हानि होने की आशंका रहती है। इसको मुख्य द्वार पर लटका कर उन स्रोतों को वापस लौटाया जाता है जो घर को हानि पहुंचा सकते हैं। ये स्रोत हैं तीखे कोने, ऊंचे टावर, खम्बे, जहां से ‘जहरीले तीर’ घर में आने का सन्देह होता है।
बागवा दर्पण की बनावट यीन ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करती है अतः इनको घर के अन्दर बिल्कुल न टांगे वरना घर वालों पर इसका प्रतिकूल असर पड़ेगा। बागवा दर्पण अपने मुख्य द्वार पर एवं पीछे के द्वार पर लगाने से नकारात्मक ऊर्जा रुक जाती है। यह सकारात्मक ऊर्जा को घर से बाहर नहीं जाने देता है।
3. पाकुआ – मुख्य द्वार के सामने किसी भी प्रकार का द्वार वेध या अशुभ स्थान होने पर इसे द्वार से ऊपर बाहर लगाया जाता है। जिससे नकारात्मक ऊर्जा अन्दर नहीं आती।

नमस्कार । मेरा नाम अजय शर्मा है। मैं इस ब्लाग का लेखक और ज्योतिष विशेषज्ञ हूँ । अगर आप अपनी जन्मपत्री मुझे दिखाना चाहते हैं या कोई परामर्श चाहते है तो मुझे मेरे मोबाईल नम्बर (+91) 7234 92 3855 पर सम्पर्क कर सकते हैं। धन्यवाद ।
4. दोहरा खुशी संकेत – इस चिन्ह को घर के दक्षिण पश्चिम में लगाने से घर में खुशियों के मौके बढ़ते हैं। विवाह योग्य लड़के-लड़कियों की शादी शीघ्र हो जाती है।
5. मिस्टिक नॉट सिम्बल – रहस्यमय गांठ अर्थात जिसका न प्रारम्भ पता है न अंत। इस चिन्ह को घर व आफिस की उत्तर दिशा में लगाने से धन व स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।
6. एनीमल सेट – इसे ड्राईंग रूम की चारों दिशाओं में लगाया जाता है। ड्रैगन पूर्वी दीवार पर, टाईगर पश्चिमी दीवार पर फिनिक्स दक्षिणी दीवार पर तथा कछुआ उत्तर की दीवार पर लगाया जाता है। इसे लगाने से व्यक्ति की चहुँमुखी उन्नति होती है।
7. बांसुरी – बीम के प्रभाव को कम करने के लिए बाँसुरियों पर लाल रिबन लपेट कर बीम के साथ इस प्रकार लटकाते हैं कि बाँसुरी का मुँह नीचे की ओर रहे और आपस में त्रिकोण बनाएं।
8. विंड चाइम – विंड चाइम अर्थात् हवा से जिसमें झंकार हो, ऐसी पवन घंटी घर व व्यापार के वातावरण को मधुर बनाती है वास्तु और फेंग शुई के पाँच तत्वों को दर्शाने वाली पाँच रॉड की विंड चाइम शुभ मानी जाती है। ब्रह्म स्थान पर लगाने से स्वास्थ्य लाभ व उत्तर पश्चिम में लगाने से जीवन में नये सुअवसर प्राप्त होते हैं।
इसकी आवाज मधुर व दिलकश होनी चाहिए। इसे मुख्य द्वार के पास भी लगाया जा सकता है, जिससे द्वार से आने वाली हवा से इसमें झंकार हो ।
9. रत्नों का पेड़ – घर में सुख, सौभाग्य और शान्ति की वृद्धि करना चाहते हैं तो रत्नों का पेड़ अपने घर में रखें। इसे पश्चिम दक्षिण अथवा उत्तर में रखना शुभ होता है। यह व्यापार व धन के लिए उपयोगी है। रत्नों के उपयोग से ग्रहों के खराब प्रभावों में कमी आ जाती है और सुख-समृद्धि की आशाएं बढ़ती हैं।
10. फिनिक्स – फीनिक्स चीन की पौराणिक कथाओं में वर्णित असाधारण पक्षी है। फेंगशुई के अनुसार यह इच्छा पूरी होने वाले भाग्य का प्रतीक है। अपने भाग्य को क्रियाशील करने के लिए आप फीनिक्स के प्रतीक के रूप में उक्त चित्र या पेन्टिंग दक्षिण कोने में लगाइए।
दक्षिण कोने को गतिशील करने के लिए फीनिक्स बहुत ही प्रभावशाली है दक्षिण दिशा में फीनिक्स का चित्र होना दूरदर्शिता का भी प्रतीक है जो किसी भी बुद्धिमान व्यवसायी के लिए आवश्यक है।
11. धातु का कच्छप – लंबी गर्दन वाला धातु का कच्छप भी वास्तु दोष कम करता है तथा वातावरण को शांत और समृद्ध बनाता है। रोग, दोष एवं अशुभता स्वयं नष्ट हो जाते हैं। कई पौराणिक कथाओं में कच्छप को ईश्वर का रूप भी माना जाता है। किसी भी धर्म या संप्रदाय के लोग इसे रख सकते हैं।
धातु का कच्छप, व्यापार स्थल, कार्यालय, या घर में, किसी मेज़ पर रख कर, मुख्य दरवाजे की ओर रखा जाता है। दरवाजे से प्रवेश करने वाले व्यक्ति को यह देखता है। आने वाले व्यक्ति में इसका प्रभाव स्वतः प्रवेश कर जाता है। जिन व्यक्तियों को प्रतिदिन अनेक लोगों से मिलना होता है, वे इस कच्छप को अपनी मेज़ पर रख कर कार्य करें तो बेहतर सफलता मिलेगी और मन प्रसन्न रहेगा।
प्रतिदिन विष्णु मंत्र से कच्छप की पूजा करने से ज्ञान और भक्ति में वृद्धि होती है। कच्छप के सम्मुख घी का दीपक जलाने से घर में सुख समृद्धि आती है। कच्छप को शयन कक्ष में रखने से बुरे सपने नहीं आते हैं।
12. स्फटिक बॉल – क्रिस्टल ऊर्जा वर्धक होते हैं। यह सकारात्मक किरणों के प्रभाव को बढ़ा देते हैं। यदि इसे पूर्व दिशा में इस प्रकार लगाया जाए कि प्रातः सूर्य की किरणें इस पर पड़ें तो यह सारे घर को जगमगा देता है।
पूर्व दिशा में लगाने से स्वास्थ्य लाभ होता है। उत्तर पश्चिम दिशा में लगाने से परिवार में आपसी प्रेम बढ़ता है और आपके मित्रों व सहायकों की संख्या में वृद्धि करता है। पश्चिम में लगाने से संतान सुख व दक्षिण पश्चिम में लगाने से दाम्पत्य संबंधों में सुधार होता है।
13. तीन टांगों वाला मेंढ़क – मुँह में सिक्का लिए तीन टाँग का मेंढक भी इस प्रकार ही लगाना चाहिए जिससे यह लगे कि यह धन लेकर घर के अंदर आ रहा है। इसे रसोई या शौचालय में कभी नहीं रखना चाहिए। यदि व्यापारिक स्थल पर लगाना हो तो भी इस प्रकार लगायें कि ग्राहक से धन लेकर आपके पास आ रहा है। इसे छिपा कर भी रखा जा सकता है।
14. हंसते हुए बुद्ध की मूर्ति – हंसते हुए बुद्ध की मूर्ति धन दौलत के देवताओं में से एक मानी जाती है। इससे घर में संपन्नता, सफलता और समृद्धि आती है। इसे घर में या व्यापारिक स्थल में इस प्रकार लगाना चाहिए, जिससे यह लगे कि यह धन लेकर घर के अंदर की तरफ आ रहे हैं। यह मूर्ति शयन कक्ष तथा भोजन कक्ष में नहीं रखनी चाहिए। ड्राईगंरूम में रख सकते हैं।
पीठ पर धन की पोटली लेकर अन्दर आते हुए लाफिंग बुद्धा सबसे उत्तम माने गये हैं। सम्पत्ति के इस देवता की पूजा या अराधना नहीं की जाती बल्कि इसे सजा कर रखा जाता है क्योंकि इसकी उपस्थिति शुद्ध रूप से प्रतीकात्मक और शुभ मानी जाती है।
15. लव बर्डस – पति पत्नी के आपसी सम्बन्धो को मधुर बनाने के लिए इसे शयन कक्ष में लगवाया जाता है।
16. सौभाग्यदायक सिक्का – फेंग शुई भाग्यशाली सिक्के के मध्य में छेद होता है तथा इस पर फेंग सुइ की शुभ बातें अंकित होती हैं। फेंग शुई का यह भाग्यशाली सिक्का तीन की संख्या में लाल फीते में बांध कर घर में लटकाने से संपत्ति की वृद्धि होती है। इसे घर कार्यालय, या गाड़ी में लटकाना शुभ माना गया है। भाग्यशाली सिक्के को घर में लटकाने से कार्यव्यवस्था में सुधार आता है तथा कार्यालय में लगाने से लाभ और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
यह सौभाग्यदायक सिक्का अनेक प्रकार के धातु, प्लास्टिक आदि से निर्मित किया जाता है। कुछ लोग इसे पूजा के स्थान पर रखना शुभ मानते हैं। यह कम कीमत का विशेष उपयोगी एवं महत्वपूर्ण सिक्का है, जिसे किसी भी जाति, धर्म और देश का व्यक्ति उपयोग कर सकता है।
17. सुनहरी मछली – सुनहरी मछली धन और समृद्धि की वृद्धि करती है। इनको घर की उत्तर दिशा में पूर्व की ओर मुँह करके लगाना चाहिए। इसे भगवान विष्णु का मत्स्य अवतार माना गया है।
18. ड्रैगन – ड्रैगन उत्तम यांग ऊर्जा का प्रतीक है। इसका सम्बन्ध पूर्व दिशा से जुड़ा हुआ है। इस दिशा का तत्व काष्ठ है। इसलिए लकड़ी की नक्काशी वाला ड्रैगन अच्छा रहता है। मिट्टी व स्फटिक बना हुआ भी रख सकते हैं परन्तु धातु का कभी मत रखिए क्योंकि पूर्व दिशा में धातु काष्ठ को नष्ट कर देती है।
ड्रैगन यांग ऊर्जा का प्रतीक होने के कारण रेस्टोरेन्ट, दुकानं, डिपार्टमेन्टल स्टोर आदि जहां पर ऊर्जा की अधिक आवश्यकता होती है लोगों का आना-जाना अधिक रहता है वहां पर भी पूर्व दिशा में चित्र रखना बहुत अच्छा होता है। इसे शयनकक्ष में न लगाएं क्योंकि वहां यांग ऊर्जा की जरूरत नहीं होती है।
19. ड्रैगन के मुँह वाला बोट – संयुक्त परिवार को एकजुट बनाये रखने के लिए इसको घर के दक्षिणी पश्चिमी कोने में रखना चाहिए ।
20. लुक, फुक और साउ – चीन के प्रत्येक घर में आपको इन तीन चीनी देवताओं की मूर्तियां देखने को मिलेंगी। लुक, फुक और साउ क्रमशः समृद्धि, उच्च श्रेणी एवं दीघार्यु के देवता हैं। इनकी उपस्थिति केवल प्रतीकात्मक होती है, पूजा नहीं की जाती।
इनकी उपस्थिति समृद्धि, प्रभुत्व, सम्मान, दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य एवं सौभाग्य को सुनिश्चित करती है। फुक समृद्धि के देवता हैं, वे अन्य दोनों देवताओं से कद में ऊँचे हैं। आम तौर पर उन्हें बीच में रखा जाता है।
21. एजुकेशन टावर – विद्या की सीढ़ियों को चढने के लिए एजुकेशन टावर को विद्यार्थियों की स्टडी टेबल पर लगवाया जाता है। इसे सामने रख कर पढ़ने से पढाई में ध्यान एकाग्रचित होता है । इच्छा शक्ति व तर्क शक्ति में वृद्धि होती है। अधिक पढ़ने की प्रेरणा मिलती है।
22. मैंडरिन डक – चीनी संस्कृति में मँडरिन बत्तख का जोड़ा नौजवान पति-पत्नियों के बीच प्रेम एवं रोमान्स का प्रतीक होता है। इन्हें घर की दक्षिण-पश्चिम दिशा के कोने में अथवा शयनकक्ष की दक्षिण-पश्चिम दिशा के कोने में रखना चाहिए ।
यदि विवाह के इच्छुक हैं तो आप इन बत्तखों की पेन्टिंग अपने शयनकक्ष में लटका सकते हैं। इस बात का ध्यान रखें कि आप बत्तख का एक जोड़ा रखेंगे। सिर्फ एक बत्तख नहीं रखेंगे और न ही तीन बत्तखें रखेंगे अकेली रखने का परिणाम यह होगा कि आप अकेले (अविवाहित ) ही रहेंगे।
तीन रखने का परिणाम यह होगा कि आपके वैवाहिक जीवन में कसी तीसरे व्यक्ति का प्रवेश हो सकता है। यह जोड़ा रखने से पहले ध्यान रखें कि एक बत्तख नर और दूसरी मादा हो।
23. क्रिस्टल ग्लोब – क्रिस्टल ग्लोब को घर या व्यापारिक स्थल पर इस प्रकार रखना चाहिए कि यह आपके सामने रहे और दिन में कम से कम तीन बार इसे घुमाना चाहिए। यह कैरियर व व्यापार की सफलता तथा शिक्षा व ज्ञान की वृद्धि में सहायक होगा।
Related Posts
0 Comments